जीवन क्या है और यह क्यों मिला है। व्यक्ति के मन में इसी प्रकार के तमाम सवाल चलते हैं। मोक्ष प्राप्ति के लिए मनुष्य क्या नहीं करता फिर भी अपने पथ से भटक कर पाप
के मार्ग पर चला जाता है। जीवन में सबसे बड़ा कष्ट देने वाला मात्र एक शब्द 'मैं' है। जब तक मन से इसे नहीं निकाला जाएगा जब तक इस संसार के मरहम का बोध नहीं होगा।
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लोग समझते है कि राधा और कृष्ण अलग-अलग है किंतु वैद पुराणों के अनुसार इन्हें प्रेमी भक्त ही समझ सकते है। वास्तव में व्यक्ति के हृदय में जैसे-जैसे प्रेम बढ़ता है
राधा का भाव जागृत होने लगता है और जैसे-जैसे व्यक्ति भावों में डूबता है तब उसका कृष्ण तत्व जागृत होने लगता है। इस गुत्थी को सिर्फ अनुभव करने वाला ही जान सकता है
राधा का भाव जागृत होने लगता है और जैसे-जैसे व्यक्ति भावों में डूबता है तब उसका कृष्ण तत्व जागृत होने लगता है। इस गुत्थी को सिर्फ अनुभव करने वाला ही जान सकता है
श्रीमद्भागवत कथा में भारतीय धर्म और संस्कृति का समावेश है। श्रद्धालु श्रोताओं को भागवत कथा प्रथम दिन से ही सुनने की जरूरत है। आवश्यकता सिर्फ इस बात की है
कि कथा प्रागंण में आने के पूर्व अपने आचरण को पूरी तरह पवित्र बना लें। शुद्ध मन से कथा का श्रवण करें मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।
कि कथा प्रागंण में आने के पूर्व अपने आचरण को पूरी तरह पवित्र बना लें। शुद्ध मन से कथा का श्रवण करें मोक्ष का मार्ग प्रशस्त हो जाएगा।